हिन्दुओ ! अपने धर्म की रक्षा करो

save hinduism

सब धर्मों में हिन्दू धर्म उत्तम कहा गया है । सब हितैषी लोगों के द्वारा इसकी रक्षा की जानी चाहिए, इसका प्रचार किया जाना चाहिए ।

आपको हिन्दू-शक्ति को जगाना है जिससे कोई आप पर हाथ न उठाये, उस शक्ति को जगाना है जिससे आप पृथ्वी पर ऊँचा माथा करके इज्जत के साथ चल सकें । इसलिए हिन्दू-संगठन की आवश्यकता है । जो माई के सच्चे सपूत हैं, जो सोच सकते हैं, जिनका दिमाग अच्छा है, वे एक हों, संगठित हों । कौन नहीं जानता कि हिन्दू धर्म संसार के सब धर्मों में उदार है ! इतनी उदारता और किसी धर्म में है ? किसी धर्म में भूतमात्र (प्राणिमात्र) की चिंता (हित-चिंतन) का विधान है ? लोग क्यों उन्हें (हिन्दुओं को) अहिन्दू बनाने पर तुले हैं ? हिन्दुओ ! अपने धर्म की रक्षा करो, आपत्काल पर विचार करो और समय की प्रगति पर ध्यान दो । संसार में हिन्दू जाति का दूसरा कोई देश नहीं है । अन्य जातियों के लिए तो दूसरे देश भी हैं पर हिन्दुओं के लिए केवल हिन्दुस्तान है । उनके लिए यही सर्वस्व है । यही उनके मंदिरों और मूर्तियों का स्थान है । अतः इस देश में सुख-शांति स्थापित करने का दायित्व उन्हींका है ।

– महामना पं. मदनमोहन मालवीयजी

(मालवीयजी के सपनों का भारत’ से संकलित)

भारत में पादरियों द्वारा धर्म-प्रचार हिन्दू धर्म को मिटाने का खुला षड्यंत्र है, जो कि एक लम्बे अरसे से चला आ रहा है । हिन्दुओं का तो यह धार्मिक कर्तव्य है कि वे ईसाइयों के षड्यंत्र से आत्मरक्षा में अपना तन-मन-धन लगा दें ।

पं. श्रीराम शर्मा आचार्य

(अखंड ज्योति’ पत्रिका, जनवरी १९६७ से)

हर एक व्यक्ति जो हिन्दू धर्म को छोड़कर जा रहा है (धर्मांतरित हो रहा है), वह एक हिन्दू कम ही नहीं हुआ बल्कि हिन्दू समाज का एक दुश्मन और बढ़ा है ।

– स्वामी विवेकानंद

(प्रबुद्ध भारत’ पत्रिका, अप्रैल १८९९ से)

जो भी हिन्दू संस्कृति और हिन्दू जीवन अपनाते हैं, चाहे वे आस्तिक हों या नास्तिक, संशयवादी हों या जड़वादी, सब-के-सब हिन्दू हैं ।

हिन्दू धर्म में जबरदस्ती या डरा के काम कराने की पद्धति नहीं है बल्कि वह समझाकर, सुझाव रख के काम कराने पर विश्वास करता है । हिन्दू धर्म ने अपने से भिन्न मतवालों पर अत्याचार करने को प्रोत्साहन नहीं दिया । अन्य धर्मों की अपेक्षा इसका इतिहास पवित्र है ।

पूर्व राष्ट्रपति डॉ. राधाकृष्णन्

(हिन्दुओं का जीवन दर्शन’ पुस्तक से)

यदि मेरे पास कानून बनाने का अधिकार होता तो मैं धर्म-परिवर्तन बंद करवा देता । मिशनरियों के प्रभाव से हिन्दू परिवार का विदेशी भाषा, वेशभूषा, रीति-रिवाज के द्वारा विघटन हुआ है ।

महात्मा गांधी 

(हरिजन’, ५ नवम्बर, १९३५ से)

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