बलात्कार के झूठे केस में ६ साल की सजा काटने के बाद निर्दोष बरी

Fake Rape cases

बलात्कार के झूठे मामले में एक निर्दोष को ६ साल जेल में काटने पड़े, बाद में सच्चाई सामने आने पर उसे बाइज्जत बरी कर दिया गया । लेकिन इस बीच उसका घर-परिवार, नाते-रिश्तेदार, पूरा जीवन बिखर गया और समाज का तिरस्कार सहना पड़ा सो अलग । सदमे से उसके पिता चल बसे, पत्नी घर छोड़कर चली गयी और दोनों बेटियाँ अनाथालय पहुँच गयीं ।

पीड़ित गोपाल शेट्टे ने सजा देनेवाले सत्र न्यायालय के न्यायाधीश, पैरवी करनेवाले सरकारी वकील और झूठी जाँच-पड़ताल करके फँसानेवाले जाँच अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही करने की माँग की है, साथ ही २०० करोड़ रुपये का हर्जाना भी माँगा है ।

कानून में झूठे सबूतों के आधार पर किसी निर्दोष को सजा दिलानेवालों के लिए कड़ी सजा का प्रावधान है ।

पुलिस ने कैसे बनाया निर्दोष को अपराधी ?

सन् २००९ में मुंबई के घाटकोपर रेलवे स्टेशन के पुल पर एक लड़की से बलात्कार हुआ था । बलात्कारी का नाम गोपी बताया गया था । रेलवे पुलिस ने गोपी की जगह गोपाल को धर पकड़ा । गोपाल का दावा है कि उसने पुलिस को बताया कि वह गोपी नहीं गोपाल रामदास शेट्टे है लेकिन उसकी बात नहीं सुनी गयी । चार दिन तक बिना किसी लिखा-पढ़ी के उसको लॉकअप में रखा और बाद में आरोपी बना दिया । जब लड़की को पहचान के लिए बुलाया गया तो लड़की उसे पहचान नहीं पायी लेकिन पुलिस ने उँगली से इशारा कराके शिनाख्त करा दी ।

पुलिस का दावा निकला सरासर झूठ

हैरानी की बात तो यह है कि पुलिस ने जिस सीसीटीवी फुटेज में गोपाल को देखे जाने का दावा किया था, उसे सबूत ही नहीं बनाया गया । गोपाल ने आरटीआई के जरिये सीसीटीवी के फुटेज माँगे । पहले तो पुलिस ने बहाना बनाया कि वे डिलीट हो गये, बाद में गोपाल के अपील करने पर पुलिस को वे फुटेज देने पड़े । सीसीटीवी में मिले फुटेज तथाकथित घटना के न होकर कुछ और ही थे । इस आधार पर गोपाल को बरी कर दिया गया ।

इसी प्रकार द्वारका के स्वामी केशवानंदजी को भी झूठे केस में ७ वर्ष की सजा काटनी पड़ी । संत आशारामजी बापू के जोधपुर केस में भी मुख्य गवाह सुधा पटेल के बयान से यह बात दुनिया के सामने आ चुकी है कि किस प्रकार पुलिस ने सुधा पटेल के नाम से बापू के खिलाफ झूठा बयान बनाया था ।

किसी एक पक्ष के महत्त्वपूर्ण बिंदुओं को पुलिस किस प्रकार नजरअंदाज करती है, इसका ताजा उदाहरण बापू के केस में देखने को मिला । इसका खुलासा करते हुए डॉ. सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा : ‘‘(बापू पर आरोप लगानेवाली) लड़की के फोन रिकॉड्स से पता लगा कि जिस समय पर वह कहती है कि वह कुटिया में थी, उस समय वह वहाँ थी ही नहीं ! उसी समय बापूजी सत्संग में थे और आखिर में मँगनी के कार्यक्रम में व्यस्त थे । वे भी वहाँ कुटिया में नहीं थे ।’’ इतनी महत्त्वपूर्ण बात को पुलिस द्वारा नजरअंदाज किया जाना, यह पुलिस की पक्षपातपूर्ण कार्यवाही नहीं तो और क्या है ?

पुलिस व न्यायपालिका को जनता के विश्वास को बनाये रखना होगा ।

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